धर्म

जानिए! आज का दिशा शूल, शुभ मुहूर्त, ग्रह गोचर और बहुत कुछ पंडित विकास त्रिवेदी जी से

DAY NIGHT NEWS LUCKNOW

PT. VIKAS TRIVEDI

🌺🙏 महर्षि पाराशर पंचांग 🙏🌺
🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏
ll जय श्री राधे ll
🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺

दिनाँक-: 22/07/2021,गुरुवार
त्रयोदशी, शुक्ल पक्ष
आषाढ
(समाप्ति काल)

तिथि———– त्रयोदशी 13:32:13 तक
पक्ष————————– शुक्ल
नक्षत्र—————मूल 16:24:02
योग————— ऐन्द्र 12:44:09
करण————– तैतुल 13:32:13
करण————— गर 24:06:31
वार———————— गुरूवार
माह————————-आषाढ
चन्द्र राशि——————– धनु
सूर्य राशि——————– कर्क
रितु—————————-वर्षा
आयन—————– दक्षिणायण
संवत्सर——————— प्लव
संवत्सर (उत्तर)——– आनंद
विक्रम संवत————— 2078
विक्रम संवत (कर्तक)—- 2077
शाका संवत————– 1943

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:38:24
सूर्यास्त—————– 19:12:41
दिन काल————– 13:34:17
रात्री काल————- 10:26:14
चंद्रोदय—————- 17:52:31
चंद्रास्त————— 28:23:14

लग्न—- कर्क 5°17′ , 95°17′

सूर्य नक्षत्र——————– पुष्य
चन्द्र नक्षत्र——————- मूल
नक्षत्र पाया——————-ताम्र

🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩

भा—- मूल 10:55:03

भी—- मूल 16:24:02

भू—- पूर्वाषाढा 21:53:21

धा—- पूर्वाषाढा 27:23:09

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद

सूर्य= कर्क 05°32 ‘ पुष्य , 1 हु
चन्द्र = धनु 06°23 ‘ मूल, 3 भा
बुध = मिथुन 23°57′ पुनर्वसु ‘ 2 को
शुक्र= सिंह 05°55, मघा ‘ 2 मी
मंगल=सिंह 00°30 ‘ मघा ‘ 1 मा
गुरु=कुम्भ 06°30 ‘ धनिष्ठा , 4 गे
शनि=मकर 18°43 ‘ श्रवण ‘ 3 खे
राहू=(व)वृषभ 14°05 ‘ रोहिणी , 2 वा
केतु=(व)वृश्चिक 14°05 अनुराधा , 4 ने

🚩💮🚩शुभा$शुभ मुहूर्त🚩💮🚩

राहू काल 14:07 – 15:49 अशुभ
यम घंटा 05:38 – 07:20 अशुभ
गुली काल 09:02 – 10:44
अभिजित 11:58 -12:53 शुभ
दूर मुहूर्त 10:10 – 11:04 अशुभ
दूर मुहूर्त 15:36 – 16:30 अशुभ

🚩गंड मूल 05:38 – 16:24 अशुभ

💮चोघडिया, दिन
शुभ 05:38 – 07:20 शुभ
रोग 07:20 – 09:02 अशुभ
उद्वे ग 09:02 – 10:44 अशुभ
चर 10:44 – 12:26 शुभ
लाभ 12:26 – 14:07 शुभ
अमृत 14:07 – 15:49 शुभ
काल 15:49 – 17:31 अशुभ
शुभ 17:31 – 19:13 शुभ

🚩चोघडिया, रात
अमृत 19:13 – 20:31 शुभ
चर 20:31 – 21:49 शुभ
रोग 21:49 – 23:08 अशुभ
काल 23:08 – 24:26* अशुभ
लाभ 24:26* – 25:44* शुभ
उद्वेग 25:44* – 27:02* अशुभ
शुभ 27:02* – 28:21* शुभ
अमृत 28:21* – 29:39* शुभ

💮होरा, दिन
बृहस्पति 05:38 – 06:46
मंगल 06:46 – 07:54
सूर्य 07:54 – 09:02
शुक्र 09:02 – 10:10
बुध 10:10 – 11:18
चन्द्र 11:18 – 12:26
शनि 12:26 – 13:33
बृहस्पति 13:33 – 14:41
मंगल 14:41 – 15:49
सूर्य 15:49 – 16:57
शुक्र 16:57 – 18:05
बुध 18:05 – 19:13

🚩होरा, रात
चन्द्र 19:13 – 20:05
शनि 20:05 – 20:57
बृहस्पति 20:57 – 21:49
मंगल 21:49 – 22:41
सूर्य 22:41 – 23:34
शुक्र 23:34 – 24:26
बुध 24:26* – 25:18
चन्द्र 25:18* – 26:10
शनि 26:10* – 27:02
बृहस्पति 27:02* – 27:55
मंगल 27:55* – 28:47
सूर्य 28:47* – 29:39

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

💮दिशा शूल ज्ञान————-दक्षिण
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा केशर खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

13 + 5 + 1 = 19 ÷ 4 = 3 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

💮 शिव वास एवं फल -:

13 + 13 + 5 = 31 ÷ 7 = 3 शेष

वृषभारूढ़ = शुभ कारक

🚩भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

  • जया पार्वती व्रत (गुजरात)

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

क्रोधो वैवस्वतो राहा तृष्णा वैतरणी नदी ।
विद्या कामदुधा धेनुः सन्तोषो नन्दनंवनम् ।।
।।चा o नी o।।

क्रोध साक्षात् यम है. तृष्णा नरक की और ले जाने वाली वैतरणी है. ज्ञान कामधेनु है. संतोष ही तो नंदनवन है.

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: आत्मसयंमयोग अo-06

असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्‌ ।,
अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते ॥,

श्री भगवान बोले- हे महाबाहो! निःसंदेह मन चंचल और कठिनता से वश में होने वाला है।, परन्तु हे कुंतीपुत्र अर्जुन! यह अभ्यास (गीता अध्याय 12 श्लोक 9 की टिप्पणी में इसका विस्तार देखना चाहिए।,) और वैराग्य से वश में होता है॥,35॥,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *